नरकासुर वध कथा
Naraka Chaturdashi नरक चतुर्दशी भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध की कथा पद्म पुराण के उत्तर खंड में नरक चतुर्दशी के त्योहार से जुड़ी एक कथा का विस्तृत वर्णन मिलता है। प्राचीन काल में, नरकासुर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली और पराक्रमी राक्षस रहता था। नरकासुर भूमि, यानी देवी पृथ्वी का पुत्र था। जब भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण करके देवी पृथ्वी का उद्धार किया, तब भगवान वराह के दिव्य स्पर्श से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई। भूमि का पुत्र होने के कारण उसे भौमासुर के नाम से जाना जाने लगा। कालांतर में, यही भौमासुर नरकासुर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। एक बार, नरकासुर ने अपनी शक्तिशाली भुजाओं के बल पर युद्ध में देवराज इंद्र और सभी देवताओं को पराजित कर दिया। उसने देवमाता अदिति के दिव्य कुंडल भी छीन लिए। इसके अलावा, वह देवताओं के बहुमूल्य रत्न, इंद्र के हाथी ऐरावत, दिव्य घोड़े उच्चैःश्रवा, कुबेर के रत्न-आभूषण और 'पद्मनिधि' नामक शंख को भी उठा ले गया। नरकासुर आकाश में कहीं भी आ-जा सकता था और उसने स्वर्ग में एक भव्य नगर भी बसा लिया था, जहाँ वह रहता था। एक दिन, नरकासुर के आतंक से परेशान ...